New Moral Hindi Story For Moral Values – Hindi Short Stories

Moral Hindi Story : आप सभी का अवगत है हमारी वेबसाइट Moralhindistory.com पर. आज हम बात करने वाले है Moral Hindi Story के बारे में. आज हम आपके लिए कुछ नै प्रेरणादायी कहानी लेकर ए है जिसे पढके आप भी अपने जीवन में कुछ न कुछ बदलाव ला सकते है. आज हम यह पर कुछ नै कहानिया हिंदी में लेकर ए है जिसके बारे में हम यहाँ थोड़ी कहानी बताने वाले है. तो चलिए शरू करते है New Moral Story In Hindi.

New Short Hindi Stories For Moral Value

राजा सुखी या फ़क़ीर

Moral Story in Hindi : एक नगर में राजा रहता था. वह बहुत ही उदास रहता था. जिसके कारण राजा की तबीयत खराब होती चली जा रही थी. वैद्य अपने तरीके से दवाई देकर भी थक गए थे. सभी दवाओं का प्रयोग करने के बावजूद भी उसकी यह उदासी जाने का नाम नहीं ले रही थी.

इसके बारे में मंत्री ने रानी और राज वेद के साथ बैठक करने की सोची. महामंत्री ने कहा अगर इस तरह से चलता रहा तो राजा की मृत्यु हो जाएगी.

रानी ने कहा कि नगर में यह कह दिया जाए कि जो कोई भी व्यक्ति राजा की उदासी को दूर करता है उसको इनाम दिया जाएगा.

इस बात को सुनते हुए एक वृद्ध व्यक्ति दरबार में आता है और कहता है कि राजा को किसी सुखी इंसान का शर्ट पहना दिया जाए तो उसकी उदासी दूर हो सकती है. रानी ने उस वृद्ध व्यक्ति को इनाम के साथ चेतावनी भी दी कि अगर इस अनुसार नहीं हुआ तो आप को जेल भेज दिया जाएगा. तभी सब तरफ सैनिकों को भेज दिया गया. सैनिको गांव गांव जाकर सभी अमीर लोगों से मिलने लगे तो सैनिकों ने देखा कि कोई भी सुखी व्यक्ति नहीं मिल रहा है. किसी को अच्छी पत्नी नहीं थी, किसी को अच्छे लड़कियां नहीं थे, किसी को मुनाफा नहीं हो रहा था और किसी को पैसे नहीं आ रहे थे.

उसके बाद गांव के बाकी नागरिको को मिलने के बाद पूछा गया कि आप सुखी हो या नहीं? उसके जवाब में लोगों ने कुछ ना कुछ अपना दुख बयान कर दिया. सबने अपनी-अपनी दुख के बारे में बताया किसी के पास घर नहीं था, किसी को अपनी बेटी की चिंता थी, किसी को अपने बेटे की चिंता थी इस तरह से गांव में चलता रहा.

तभी उनमें से एक व्यक्ति ने बताया कि गांव के बाहर एक व्यक्ति रहता है. वह हमेशा से ही सुखी अवस्था में ही रहता है. तभी सभी सैनिक वहां पर दौड़े चले गए उस व्यक्ति को मिलने के लिए. उसने पुराने कपड़े पहने हुए थे. दाढ़ी काफी बढ़ गई हुई थी. सिर पर बाल बिखरे हुए थे पर उसके चेहरे पर अपार आनंद देखने को मिल रहा था. तभी सैनिकों ने उससे पूछ लिया क्या भाई आप पूर्ण तरह से सुखी हो क्या?

तभी उस व्यक्ति ने हंसते हुए कहा हां मैं पूर्ण तरह से सुखी हूं. मुझे किसी भी प्रकार का दुख नहीं है. भगवान मुझे दो समय का खाना दे देता है, स्वास्थ्य भी मेरा बहुत अच्छा है. मुझे आता है उतना में सभी को सिखाता हूं और सभी लोगों को मैं आदर के साथ बुलाता हूं. इसके अलावा मुझे कुछ और चाहिए ही नहीं.

तभी सैनिकों ने उस व्यक्ति को कहा कि तुम हमारे साथ राजमहल में चलो. राजा आपको मिलना चाहते हैं. उस व्यक्ति ने हंसते हुए कहा कि चलो मुझे क्या फर्क पड़ता है. मैं यहां भी बैठ लूंगा और वहां भी बैठ लूंगा. सैनिक ने उस व्यक्ति को राजा के सामने खड़ा कर दिया. रानी ने कहा कि यह व्यक्ति सबसे सुखी है. वह व्यक्ति बोला हंसते हुए मुझे किस बात का दुख. रानी ने कहा आपने जो कपड़े पहने हुए हैं वह कपड़े राजा को दे दो. जिससे राजा का रोग मिट जाए. वह व्यक्ति फिर से जोर जोर से हंसने लगा और बोला कि लो मेरे कपड़े और अगर इससे राजा का दुख उदासी कम होती है तो मुझे क्या फर्क पड़ता है. इससे मुझे भी आनंद मिलेगा राजा ने उस कपड़े को पहन लिया और उसको तुरंत ही सब अच्छा लगने लगा.

तभी राजा बोल उठा कि इस कपड़े में ऐसा क्या है कि मुझे इस तरह का एहसास होने लगा. उस व्यक्ति ने कहा कि राजा जी यह कपड़े मुझे किसी ने खुश होकर भेट दिए हुए थे. इसलिए मुझे सुख मिल गया. मैंने भी आपको खुश होकर यह भेट दी है इसलिए आपको भी सुख का अनुभव हो गया. कोई अगर खुश होकर कोई भेट देता है तो सुख मिलता है. और देने वालों को भी सुख की संतुष्टि मिलती है. व्यक्ति ने और भी कहा कि आपको जो कोई भी खुशी से देता है उसको पहना करो ताकि उदासी आप से दूर रहे.

सिख : “ इससे पता चलता है की राजा सुखी या फ़क़ीर

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जैसे के साथ तैसा

Hindi Short Story with Moral Value : एक छोटा सा नगर था. इस नगर में सभी लोग मिलकर खुशी से अपना जीवन व्यतीत कर रहे थे. गांव के लोग अपने व्यवसाय अनुसार अपना काम कर रहे थे और अपना सुखी जीवन व्यतीत कर रहे थे. इस गांव में एक मोहन नाम का व्यक्ति फ्री रहता था. वह स्वभाव से लोभी और स्वार्थी था. वह सब्जी बेचने का धंधा करता था. वह अपने खेत में ही अलग-अलग प्रकार की सब्जी उगाया करता था. उसके बाद वह बाजार आकर बेच दिया करता था.

1 दिन की बात है. मोहन अपनी सब्जी लेकर गांव की गलियों में बेच रहा था. उसकी सब्जी आलू, प्याज, टमाटर, मिर्च, रिंगन जैसी सब्जी थी. सब्जी वाले को देखकर रमा बहन सब्जी लेने के लिए बाहर आ गई. उसने मोहन को कहा मोहन मुझे 5 किलो आलू दे दो. मोहन 5 किलो आलू तोलने लगा.

उसने जानबूझकर आलू कम डालें. इसे देखकर रमा बहन बोल उठे भैया यह आलू तो कम है. पूरे 5 किलो नहीं है. तब मोहन बोला सेठानी मैंने जानबूझकर आलू कम दिए हुए हैं क्योंकि आपको वजन ज्यादा उठाना ना पड़े.

यह बात सुनकर रमा बहन समझ गई कि मोहन बहुत लालची है. वह सभी को इस तरह से सब को उल्लू बनाता है. तभी उसने सोचा कि क्यों ना मोहन को कुछ सीख दी जाए. उसने भी 5 किलो आलू के पैसे की वजह है 4 किलो आलू के पैसे दिए. तभी मोहन ने पैसे गिने और कम थे. इसलिए रमा बहन को कहा कि सेठानी जी इसमें तो पैसे कम है. तभी सेठानी जी ने मोहन की भाषा में ही जवाब दिया. वह तो मैंने जानबूझकर कम दिए हैं आपको ज्यादा पैसे गिनने में तकलीफ ना हो. यह बात सुनकर मोहन सब समझ गया. उसके बाद वह लाचार था और उसकी भूल उसे समझ में आ गई थी. तभी उसने यह निश्चय किया कि व्यापार में कभी भी बेमानी नहीं करनी चाहिए.

इसके बाद मोहन कभी भी तोल में गोलमाल नहीं करता था. रमा बहन ने जैसे के साथ तैसा बनकर मोहन को अच्छे से पाठ पढ़ाया.

Moral Value Of Story : “अगर आप बेईमानी करोगे तो आप को भी कभी न कभी इसका फल भुगतना पड़ता है.

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बुद्धि बड़ी या बल

Short Hindi Story : एक गांव था गांव. के बाहर एक अच्छा सा बरगद का पेड़ था. बरगद का पेड़ इतना बड़ा था कि उसकी छांव चारों और फैल रही थी. सभी प्रकार के पक्षी उस पेड़ पर रहा करते थे. इस पेड़ पर कौवे का झुंड रहता था. बरगद के पेड़ के बीच के भाग में अपना घोंसला बनाता और गांव जाकर खाने के लिए कुछ ले आते थे.

एक दिन गांव में एक पुरी के ऊपर दो कौवे की नजर पड़ी. दोनों उस पूरी को लेने के लिए उड़े और उसके ऊपर टूट पड़े. दोनों की जांच में पूरी एक साथ आई. दोनों ने एक एक साइड से पूरी को पकड़ लिया था. युवा कौवा पूरी को अपनी ओर खींच रहा था और एक बुजुर्ग कौवा पूरी को अपनी ओर खींच रहा था. दोनों इस तरह से खींचते चले जा रहे थे. सभी कौवे इकट्ठे हुए यह देखने के लिए और अपनी आवाजों के साथ शोर मचाने लगे.

युवान कौवा बहुत ही बलवान था. लेकिन बुजुर्ग कौवा उसके साथ बुद्धिमान भी था. तभी दोनों ने यह जिद पकड़ ली थी कि हम हार नहीं मानने वाले हैं. सभी लोग यह भी कहने लगे कि आप इन पूरी को आधा-आधा कर लो. दोनों ने इस बात पर ध्यान ही नहीं दिया.

तभी एक कौवे ने कहा कि एक काम कीजिए यह पूरी मुझे दे दीजिए मैं इसको रखता हूं और आप दोनों कोई स्पर्धा कर लो और जो भी बेस्ट रहेगा उसको यह पूरी दी जाएगी. अब दोनों कौवे वह बात पर तैयार हो गए.

तभी कौवे ने कहा कि मेरे पास एक माप की दो थैली है. इसमें नमक भर दिया जाएगा और उस दोनोंको थेली को लेकर बाजू के गांव जाना है. और वापिस आना है जो भी पहले पहुंचेगा वह जीत जाएगा. आप वहां पर जाते हो की नहीं वह देखने के लिए और एक कौवा साथ आएगा.

तभी वृद्ध कौवे ने अपनी थैली में नीचे की ओर रूई डाल दिया और ऊपर नमक डाल दिया और उसके बाद युवा कौवे ने अपनी पूरी थैली में रूई डाल दिया. तभी दोनों उड़ने लगे और वृद्ध कौवा अपनी थैली को लेकर उड़ता जा रहा था. तभी युवा कौवा पूरी तरह से जोश में उड़ता हुआ उसके पास से निकला. तभी वृद्ध कौवे ने सोचा कि मेरी थैली में आधा नमक भरा हुआ है फिर भी यह युवा कौवा इतनी तेजी से जा रहा है कि जैसे उसकी थैली में कुछ है ही नहीं.

मगर युवा कौवे ने अपनी पूरी हथेली में रुई भर दी थी. तभी अचानक बारिश आना शुरू हो जाती है और युवा कौवे का रुई पूरी तरह से भीग जाता है. और वृद्ध कौवे का आधा नमक बारिश की वजह से पिघल जाता है. जिसकी वजह से उसकी थैली काफी हल्की फुल्की हो जाती है और वह काफी तेजी से उड़ने लगता है. यह सब काम निपटा कर वापस लौट रहे थे तब युवा कौवे ने अपनी हार मान ली और उस वृद्ध कव्वे को वह पूरी दे दी.

Moral Values Of Story : “यहां पर नहीं तो बुद्धि का काम चला और ना ही बल का क्योंकि जो भी जितना प्रामाणिक रहा उसी तरह उसको उतनी मदद मिल गई

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महेनत का फल

Story With moral In Hindi : राकेश और परेश दोनों भाई थे. दोनों अपने परिवार से अलग रहते थे. राकेश बहुत ही मेहनती था इसलिए वह खेती करके अपने परिवार का पालन पोषण कर रहा था और उसका भाई परेश काफी आलसी था और खेती में कुछ भी ध्यान नहीं देता था. इसलिए कुछ होता भी नहीं था. परेश की पत्नी दक्षा अपना सिलाई और कपड़े का काम करके उसका घर चला रही थी.

राकेश को ऐसा लगा कि खेती के साथ और दूसरा भी काम कर लूं तो अच्छी सी कमाई हो जाएगी. राकेश की पत्नी भी खूब मेहनत थी इसलिए उसने एक भैंस लेकर उसका दूध बेचना भी शुरू कर दिया. दूध में से अच्छी खासी कमाई होने लगी. राकेश की पत्नी खेती में से भैंस के लिए कुछ खाने को ले आती थी और उसको जरा भी आलस नहीं आती थी. उसके साथ भैंस को अच्छी तरह से रखती भी थी जिससे भैंस का दूध थोड़ा ज्यादा बढ़ने लगा.

यह काम चलते चलते उसने दूसरी भैंस भी खरीद ली और गाय को भी खरीद लिया और एक अच्छा सा फॉर्म बना दिया. दोनों काफी मेहनत करने लगे. खेती के साथ पशुपालन का भी धंधा बहुत अच्छी तरह से चलने लगा और उसमें काफी अच्छी सी कमाई होने लगी. मेहनत अपना रंग दिखाने लगी थी. आलस को निकालकर अच्छे दिल से मेहनत करके व्यक्ति को तो कुदरत भी साथ देता है. इसके साथ राकेश कुछ ही समय में धनवान बन गया. उसने अपनी मेहनत की कमाई से कच्चे घर को पक्के घर में बदल दिया. बच्चों को पढ़ाने के लिए अब राकेश किसी के पास से सहायता नहीं मांगता था.

कठोर परिश्रम का कोई विकल्प नहीं होता है जो भी करता है वह उसको हासिल करता है. मेहनत राजा होती है. उसके बाद तो राकेश का परिवार कार में घूमने लगा. सामान्य स्थिति में से मेहनत के बल से आगे बढ़कर राकेश का परिवार समाज में सम्मान पात्र बन गया फिर भी राकेश को इस बात का कुछ अभिमान नहीं था. उसके बाद उसके बेटे के लिए अच्छे घर के रिश्ते आने लगे. समाज में राकेश का नाम बढ़ता चला गया. राकेश सभी को यही कहता था कि यह तो हमारी मेहनत का फल है. अगर मेहनत करते हैं तो उसका फल एक न एक दिन मिल ही जाता है. दोनों हाथ को देखते रहने से काम नहीं हो जाता है इसलिए इस जगत में रहने के लिए कुछ ना कुछ मेहनत करते रहनी चाहिए.

यह सब देखकर राकेश का भाई भी अपने आलस को छोड़कर मेहनत करने लगा. राकेश ने उसके भाई को दो भेस लाकर दी और उसने अपने भाई को बहुत अच्छी तरह से मदद भी की.

Moral Value Of Story : “कठोर परिश्रम का कोई विकल्प नहीं होता है जो भी करता है वह उसको हासिल करता है. मेहनत राजा होती है

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प्रमाणिकता का फल

Moral Hindi Story For Children : भोला नाम का एक सब्जी वाला था. वह हर रोज मार्केट से सब्जी खरीद कर लाता था. सब्जी को अपने लोरी पर रखकर बेचने निकलता था.

कुछ एरिया और कुछ सोसाइटी भोला को पहचानती थी. भोला हर रोज वहां पर सब्जी बेचने जाया करता था और दोपहर तक सब्जी बेचता था और फिर कर वापस लौट कर आ जाता था.

बची हुई सब्जी वह अपने घर रख देता था और बाकी की सब्जी घरके आगे के रूम में बिछा देता था. लोग उसके घर पर भी सब्जी लेने आया करते थे. इसी तरह से भोला का जीवन शांतिपूर्ण चल रहा था. भोला जब बाहर सब्जी बेचता तब लोग पैसे से सब्जी खरीदते और कुछ लोग उधारी से खरीद लेते थे.

जो लोग उधार ले जाते थे वह लोग हर महीने भोला को पैसे दे दिया करते थे. पर जब भी पैसे आते थे तब लोग उसमें से 500 काट लेते थे यह सब बात भोला अच्छे से जानता था.

यह सब चलने के बावजूद भी भोला को कभी घाटा नहीं हुआ था. सभी दिन में बेचे हुई सब्जी से जो भी पैसे मिलते थे उससे अगले दिन की सब्जी ले लिया करता था और जो मुनाफा होता था. वह सब पैसा वह अपने घर के एक डिब्बे में रख देता था और ज्यादा पैसा जब भी इकट्ठे हो जाते थे तब वह अपने बैंक में रख देता था.

भोला एक इमानदार सब्जी वाला था पर जो लोग भोले के साथ चीटिंग करते उन लोगों को कभी पता ही नहीं चला कि भोले के साथ चीटिंग करके भोले को ज्यादा फायदा हो रहा था पर वह लोग जहां थे वहीं रह गए.

भोला को अपनी ईमानदारी का फल मिल रहा था. एक दिन भोले को एक होटल वाला मिल गया और उसके साथ बात फिक्स हो गई. अब भोला सबसे ज्यादा सब्जी खरीदता और सबसे पहले होटल वाले को पहुंचा देता.

इस तरह से अपनी ईमानदारी से हो भोला ने अपना धंधा बढ़ा दिया और उसका मुनाफा भी बढ़ गया. इस तरह से हम कह सकते हैं कि भोले को अपनी प्रामाणिकता का फल मिला.

Moral Value Of Story : “अगर प्रमाणिकता के साथ हम अपने जीवन में चलते है तो उसका फल हमें जरूर मिलता है

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