Lomdi aur kauwa ki kahani – लोमड़ी और कौवे की कहानी हिंदी

Lomdi aur kauwa ki kahani : आप सभी का स्वागत है हमारी वेबसाइट पर आज हम एक नई कहानी के साथ फिर से हाजिर है आज हम Lomdi aur kauwa ki kahani  के बारे में बताने जा रहे हैं हम उम्मीद करते हैं कि आपको हमारी स्टोरी पसंद आती होगी अगर आप कॉमेडी स्टोरी पसंद आती है तो जरूर से कमेंट करके बताइए.

Lomdi aur kauwa ki kahani

बहुत पुरानी बात है. एक कौवा (Kauwa) भोजन की तलाश में इधर उधर भटक रहा होता है. परंतु उसको कुछ खाने को नहीं मिल रहा था. बहुत ढूंढने के बावजूद भी उसको कुछ हाथ नहीं लग रहा था, तो वह थका हुआ एक पेड़  की डाली पर बैठ जाता है.

जब वह डाली पर बैठा होता है तो वह इधर उधर नजर करता है तो उसको एक थाली में पनीर का टुकड़ा मिल जाता है.

वह जल्दी से उड़ता हुआ वहां पर थाली के पास पहुंचा और जल्दी से पनीर के टुकड़े को अपनी चांच में ले लिया और उसको उठाकर उड़ने लगा. काफी सारे कौवे उसके पीछे पीछे उड़ने लगे और सारे कौवे उस पनीर के टुकड़े को उससे छीन ना चाहते थे.

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वह कौवा पनीर के टुकड़े को लेकर फटाफट उड़ने लगा और आखिरकार वह सारे कव्वे को चकमा देने में कामयाब हुआ.

वह कौवा उड़ता उड़ता काफी आगे निकल गया और एक पेड़ की शाखा पर जाकर बैठ गया.

कौवा जब पेड़ की डाली पर बैठा होता है तब वहां से लोमड़ी (Lomadi) गुजर रही होती है. लोमड़ी ने कौवे की चोंच में फसा एक पनीर का टुकड़ा देखा तो उसके मुंह में पानी आ गया.

लोमड़ी पनीर के टुकड़े को देखते ही कवर के पास से उस पनीर के टुकड़े को लेने की एक योजना बना ली.

लोमड़ी ने कौवे की ओर देखा और बोली – “अरे कौवे भाई तुम कितने खूबसूरत हो. मैं अपना परिचय तुम्हें दे देती हूं. मैं एक भोली भाली लोमड़ी हूं. मेरी सहेलियों ने मुझे बताया है कि तुम्हारी आवाज में एक गजब की मिठास है क्या यह बात सही है?”

कौवा यह बात सुनकर हैरान रह गया. आज तक किसी ने उसकी आवाज की तारीफ नहीं की है, परंतु कौवा कुछ बोला नहीं। वह चुप ही रहा तब लोमड़ी वापिस से बोली – “क्या तुम अपनी मधुर आवाज से कोई गाना नहीं गा सकते हो? क्या मुझे कुछ सुनाओ ना भैया”

परंतु लोमड़ी की उस बात का कौवे पर कोई असर नहीं हो रहा था. अभी भी कौवा शांत था, कुछ बोल नहीं रहा था, तो लोमड़ी फिर से बोल उठी कि – “क्या तुम अपनी प्यारी बहन की इतनी सी इच्छा भी पूरी नहीं करोगे? तुम कितनी सुंदर हो. तुम्हारे पंखों का कहना ही क्या, मेरे लिए गाना गाओ ना कौवा भैया.”

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कौवा फिर उसके झांसे में आ गया और उसने अपनी चांच खोली और कांव-कांव करने लगा. वह कांव-कांव कर रहा था तब उसका पनीर का टुकड़ा उसकी चोंच से निकला और जमीन पर आकर गिर गया.

पनीर का टुकड़ा नीचे गिरते ही लोमड़ी जड़ से उसके पास आई और उस टुकड़े को लपक लिया और खा गई. जब तक कौवे को कुछ समझ आता उसे पहले लोमड़ी वहां से चली गई.

कौवा बहुत ही निराश हो गया. इसलिए तो कहते हैं कि “कोई अगर अचानक से तारीफ करने लगे तो उसे काफी बच के रहना चाहिए.”

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