Hathi Aur Chiti Ki Kahani – हाथी और चीटी की कहानी हिंदी

Hathi Aur Chiti Ki Kahani : आप सभी का फिर से स्वागत है हमारी वेबसाइट Moral Hindi Story में. आज हम एक नई कहानी के साथ फिर से हाजिर है जो है Hathi Aur Chiti Ki Kahani. हम उम्मीद करते हैं कि आपको हमारी कहानी पसंद आती होगी तो चलिए आज एक नई कहानी हाथी और चीटी की कहानी सुनते हैं.

Hathi Aur Chiti Ki Kahani

एक नदी के किनारे बहुत बड़ा जंगल था. उस जंगल में मीठे पानी का एक तालाब था. उस तालाब के किनारे बहुत सारे पेड़ पौधे थे. उस पेड़ में एक डाली में एक छोटी सी चींटी रहा करती थी. उस जंगल में 1 दिन बहुत बड़ा तूफान आया. उस हवा के रफ्तार को सहन ना कर पाने की वजह से चिट्ठी तालाब में गिर गई.

चींटी तालाब में गिर जाने की वजह से डूबने लगी. चींटी ने बहुत कोशिश की वह तालाब के किनारे पहुंच जाए मगर वह तालाब के किनारे पहुंचने में सक्षम नहीं थी, उसकी ताकत खत्म हो गई थी.

उस समय वहां पर एक जंगली हाथी. आया उसको प्यास लगी थी तो वह तालाब के किनारे आकर पानी जोर-जोर से खींचने लगा. वह पानी को पीते चले जा रहा था तब उस हाथी को देखकर उस चींटी ने कहा की – “मेरे दोस्त मुझे बचाओ में पानी में गिर गई हूं. मेरी मदद करो, मुझे बचा लो, तुम मुझे अगर बचा लोगे तो मैं तुम्हें कभी ना कभी मदद करोगी.”

यह बात सुनकर हाथी जोर जोर से हंसने लगा और कहने लगा कि – “इतनी छोटी चींटी होकर मेरी क्या तुम मदद करोगी? जंगल में सबसे बड़ा मैं ही हूं और सबसे छोटे तुम हो. तुम कैसे मेरी मदद कर सकती हो?” इस तरह से हाथी यह सब बातें कहने लगा.

तब चींटी ने जवाब दिया हाथी जी प्लीज मेरी मदद करो. मुझे किनारे छोड़ो और तुम पुण्य कमा लो. हाथी ने बहुत गर्व से कहा ठीक है ठीक है मैं तुम्हें निकलता हूं. ऐसे कह कर हाथी ने अपनी सूंड नीचे उतार कर चींटी को बाहर निकालकर किनारे पर छोड़ दिया. चींटी ने हाथी को शुक्रिया कहा और हाथी वहां से चला गया.

कुछ दिन बीत जाने पर शिकारियों का कुछ झुंड हाथियों के पीछे पड़ गया था. क्योंकि, उन शिकारियों को उनके दांत चाहिए थे. हाथी भी उनकी जान बचाने के लिए जंगल में बहुत तेज भाग रहे थे, और शिकारियों से अपनी जान बचाने की कोशिश कर रहे थे. शिकारियों के हाथ हाथी नहीं लगे क्योंकि, हाथी वहां से भागने में कामयाब रहे तो शिकारियों को बहुत गुस्सा आया.

हाथी हाथ ना आने की वजह से शिकारी विचार करने लगे और उसने सोचा कि तालाब के पानी में जहर डाल देंगे तो हाथी अपने आप ही उस पानी को पीकर मर जाएगी. और चींटी ने यह सब सारी बातें सुन ली. वह पेड़ पर ऊपर बैठी थी तो उसको यह सब बातें पता चल गई.

जीस साथी ने चीटी की मदद की थी वह हाथी बहुत तेजी से वहां तालाब की ओर आ रहा था और तालाब में पानी पीने की कोशिश कर रहा था. चींटी तेजी से वहां पर पहुंच गई और बोली मेरे दोस्त यह पानी मत पियो इस पानी में जहर डाला हुआ है.

शिकारियों ने इस पानी में जहर डाला है. इसलिए यह पानी जहरीला हो गया है. हाथी को यह सुनकर विश्वास नहीं हो रहा था. वह एकदम आश्चर्य में पड़ गया था. चींटी ने कहा कि वह देखो सारी मछलियां जहरीले पानी पीकर मर चुकी है.

यह सब देखकर हाथी वहां से बिना पानी पिए वापस चला गया और शर्म के मारे अपने दोस्त चींटी के पास जाकर बोला – “मैंने उस दिन तुम्हारी बहुत बेइज्जती की. तुम बहुत छोटे हो ऐसा मैंने बोला इसलिए, मुझे माफ कर दो अगर, तुमने मुझे यह सब नहीं बताया होता तो मैं आज मर जाता. मैं तुम्हारा बहुत शुक्रगुजार हूं.”

शीख :

इस हाथी और चींटी की कहानी से हमें यह पता चलता है कि हमें किसी को भी बेइज्जत नहीं करना चाहिए. हमें किसी की भी बेइज्जती नहीं करनी चाहिए. चाहे वह कितना भी छोटा हो या कितना भी बड़ा. कोई कितना भी छोटा या बड़ा हो हमें एक समान ही इज्जत करनी चाहिए. हमें कभी भी घमंड नहीं करना चाहिए.

उम्मीद करते हैं कि दोस्तों आपको यह Hathi Aur Chiti Ki Kahani पसंद आई होगी. अगर आपको यह कहानी पसंद आई है तो हमें कमेंट करके जरूर बताइए. अगर आप कोई भी कहानी सुनना पसंद करते हो तो आप हमें कमेंट करके जरूर बताइए.

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