Chidiya Aur Kauwa Ki Kahani – चिड़िया और कौवा की कहानी हिंदी

Chidiya Aur Kauwa Ki Kahani : आप सभी का फिर से स्वागत है हमारी वेबसाइट Moral Hindi Story पर. हम एक और नई Chidiya Aur Kauwa Ki Kahani के साथ हाजिर है. आज हम कौवा और चिड़िया की कहानी के बारे में बात करने जा रहे हैं. उम्मीद करते हैं कि आपको हमारी कहानी पसंद आती होगी अगर आपको हमारी कहानी पसंद आती है तो हमें कमेंट करके जरूर बताइए.

Chidiya Aur Kauwa Ki Kahani

एक जंगल में एक चिड़िया रहती थी. उसने एक पेड़ की डाल पर अपने लिए एक घर बनाया था. वह और उसके बच्चे उस घर में रहते थे.

अचानक बारिश का मौसम आ गया और बहुत तेज बारिश होने लगी. चिड़िया बिचारी कहीं बाहर नहीं निकल पा रही थी. एक दिन रात को बहुत तेज हवाएं चलने लगी जिसकी वजह से चिड़िया का घर कहीं दूर जाकर गिर पड़ा. चिड़िया और उसके बच्चे बारिश में पूरी तरह से भीग चुके थे. बिचारी उस चिड़िया को कुछ समझ नहीं आ रहा था कि वह क्या करें? फिर चिड़िया ने अपने बच्चों को लेकर पास ही रहने वाले कौवे के घर गई और उसके घर का दरवाजा खटखटाया.

चिड़िया कौवे के घर को खटखटा रही थी और उसने दरवाजा खोला. तब उसने कौवे को कहा – “क्या तुम्हारे घर में मुझे थोड़ी देर के लिए जगह मिलेगी. बारिश के कारण मेरा घर उड़ गया है. मेरे बच्चे बारिश में भीग रहे हैं दरवाजा खोलो.”

तो कौवे ने कहा – “तो मैं क्या करूं उसमें?” तो चिड़िया ने कहा – “बारिश के रुकने तक हम तुम्हारे घर में रुकेंगे. मेरे बच्चे बहुत कांप रहे हैं. तो कौवे ने कहा कि मेरे बच्चे भी अभी अभी सोए हैं. अगर मैं दरवाजा खोल दूंगा तो ठंडी हवा की वजह से वह जाग जाएंगे. मैं दरवाजा नहीं खोल सकता हूं. इस तरह उस कौवे ने जवाब दिया और दरवाजा भी उसने नहीं खोला. बिचारी चिड़िया अपने बच्चों को लेकर वहां से चली गई. कुछ दिन गुजरने के बाद एक दिन चिड़िया के घर का दरवाजा किस किसी ने खटखटाया.

तब चिड़िया ने पूछा कि कौन है? तब कौवा घर के बाहर था और उसने कहा कि मैं कौवा हूं. मेरा घर बारिश की वजह से टूट चुका है. मेरे बच्चे बारिश में भीग रहे हैं. दया करके दरवाजा खोलो. आज की रात हम तुम्हारे घर में रुकने वाले हैं. तब चिड़िया ने कहा कि ठीक है आप अंदर आ जाओ. यह कह कर चिड़िया ने अपने घर का दरवाजा खोला और फिर कौवे ने अपने बच्चों को लेकर अपने पंखों में छुपा कर सुला दिया था. कुछ दिन पहले चिड़िया के साथ किए हुए बर्ताव कौवे को याद आया और वह बहुत शर्मिंदा हो गया.

कौवा चिड़िया के पास पहुंचा और कहने लगा मुझे माफ कर दो. चिड़िया इसी हालत में जब तुम मेरे पास आई थी तब मैंने तुम्हें मेरे घर में आने नहीं दिया था और ना ही दरवाजा खोला था. लेकिन तुमने मेरे बच्चों को और मुझे अपने घर में जगह दी और तुम्हारा एहसान मैं अपनी जिंदगी में कभी नहीं भूलूंगा.

तब चिड़िया बोली कोई बात नहीं कौवाजी जब तक आप नया घर नहीं बना लेते तब तक यहीं रुक जाओ. क्योंकि मैं बहुत अच्छी तरह जानती हूं कि ऐसी परिस्थिति में कैसा होता है. आप बिल्कुल चिंता मत करो.

तब कौवा बोलता है कि चिड़िया आप कितनी अच्छी हो. मैंने तुम्हारी कोई मदद नहीं की लेकिन फिर भी तुमने मेरा पूरा साथ दिया. आज से मैं तुम्हारा अच्छा दोस्त बनकर रहूंगा और हर मुश्किल वक्त में तुम्हारा साथ दूंगा

इस तरह कौवा और चिड़िया एक दूसरे के बहुत अच्छे दोस्त बन गए. कौवे ने चिड़िया को सहायता ना करने के बावजूद भी चिड़िया ने कौवे की पूरी मदद की अपनी अच्छाई साबित कर ली.

शीख :

अगर कोई हमारा ही मदद करें या ना करें हमें उसकी मदद जरूर से करनी चाहिए.इसलिए वह भी हमारी अच्छी तरह से मदद कर सके. इससे यह पता चलता है कि प्यार वह चीज है, जिससे हम गुस्सा और नफरत को भी प्यार में बदल सकते हैं. अगर हम किसी की मदद नहीं करेंगे तो हमारी भी कोई मदद नहीं करेगा.

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